Jeevan Vidya SahAstitva (Coexistence) Workshop
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जीवन विद्या सम्मेलन, 2025

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Dates

30 October 2025 – 2 November 2025

Location

BandaUttar Pradesh

Category

E- General Events

Language

Hindi [ हिन्दी ]

Prabodhak (Facilitator)

NA

Duration

4 days

Residential

Place

ग्राम बड़ोखर खुर्द, बाँदा, उत्तर प्रदेश दिनांक 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 संपर्क 9277434789, 84295991426, 9936041031 सूचना www.jvsammelan.com

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Fees & Contribution

शिविर एजुकेशन का कोई भी शुल्क नहीं है, भोजन व शिविर के अन्य खर्च का वहन हो सके, इसलिए सहयोग राशि अपेक्षित हैं

निमंत्रण 27वें जीवन विद्या सम्मेलन में आवर्तनशीलता ही परंपरा का आधार है विषय पर चिंतन-मनन करने हेतु आवर्तनशील किसान मित्र एवँ बड़ोखर खुर्द ग्राम समाज आप सभी को सादर आमंत्रित करते है स्थान ग्राम बड़ोखर खुर्द, बाँदा, उत्तर प्रदेश दिनांक 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 संपर्क 9277434789, 84295991426, 9936041031 सूचना www.jvsammelan.com -------------------------------------------- Invitation in English -------------------------------------------- You are cordially invited to the 27th Jeevan Vidya Sammelan to contemplate and discuss the topic Avartansheelta is the basis of tradition By Avartansheel Farmers and The residents of Badokhar Khurd Vilaage District: Banda, UP Venue: Badokhar Khurd Vilaage District: Banda, UP Dates: 30th November To 2nd November 2025 Contact: 9277434789, 84295991426, 9936041031 Info: www.jvsammelan.com Note: Sammelan Language is Mostly Hindi but we welcome speakers of other languages Provided translators are available. for more details please talk to Contanct number Provided as above. ======================================= सम्मलेन का विषय सम्मेलन का मुख्य विषय "आवर्तनशीलता ही परंपरा का आधार है" प्रस्तावित है। यह विचार मध्यस्थ दर्शन - सहअस्तित्ववाद (प्रणेता श्री एo नागराज जी अमरकंटक भारत) पर आधारित है। पूर्णता के अर्थ में मिलन ही सम्मेलन है और पूर्णता का यहां तात्पर्य तीन पूर्णताओं से है: गठनपूर्णता, क्रियापूर्णता एवं आचरणपूर्णता। गठनपूर्णता: जड़ परमाणु (भार बंधन - अणु बंधन युक्त) में विकास पूर्वक चैतन्यता का उद्भव अर्थात जड़ परमाणु में अंशों के प्रस्थापन-विस्थापन से मुक्त होना, गठन की निरंतरता (पूर्णता) होना, फलस्वरूप भार बंधन व अणु बंधन से मुक्त होकर आशा बंधन (चैतन्य बल-शक्ति संपन्न) से युक्त होना। ऐसे गठनपूर्ण परमाणु की ही जीवन की संज्ञा है। यह घटना प्रकृति प्रदत्त विधि से इस धरती पर संपन्न हो चुकी है। हमारी धरती पर ऐसा जीवन (गठनपूर्ण परमाणु) ही जीवों एवं मानव में प्रकट चैतन्यता का आधार है। क्रियापूर्णता: मानव शरीर यात्रा क्रम में जीव चेतना वश मानव जीवन की आंशिक बल-शक्ति में जाग्रत होता है। सर्वमानव को जीवन की पूर्ण बल-शक्ति जाग्रत करने के अवसर-साधन प्राप्त हैं। सहअस्तित्व के अध्ययन-अभ्यास पूर्वक मानव जीवन की पूर्ण बल-शक्ति को जाग्रत कर लेता है और प्रमाणित करने लगता है, प्रमाण स्वरूप समाधान-समृद्धि को प्रकट करता है। इस उपलब्धि की क्रियापूर्णता की संज्ञा है। इस स्थिति में मानव जीवन ज्ञान में परिपूर्ण रहता है और चारों आयामों एवं पाँचों स्थितियों में प्रमाणित करने के क्रम में रहता है। आचरणपूर्णता: मानव जब जागृति को प्रमाणित करने के क्रम में सभी आयाम एवं स्थितियों में प्रमाणित हो जाता है तो इसकी आचरण पूर्णता संज्ञा है। ऐसे मानव जीवन में पूर्ण जीवन तृप्ति का अनुभव रहता है। आचरणपूर्ण मानव सर्वकर्म स्वानुशासन पूर्वक मानवीय परंपरा (अखण्ड समाज–सार्वभौम व्यवस्था) की स्थापना संरक्षण के अर्थ में ही करता है। आचरणपूर्ण मानव की ही दिव्य मानव संज्ञा है। इस पूर्णता त्रय को प्रमाणित करने के अर्थ में जो मिलन है, वही सम्मेलन है। मानव में प्रमाणित होने वाली पूर्णता क्रियापूर्णता एवं आचरणपूर्णता है। लोकभाषा में क्रियापूर्णता का अर्थ समझदारी पूरा होना एवं आचरणपूर्णता का अर्थ समझदारी पूर्वक जीने में पूरा प्रमाणित होना। ===== सहभागिता यह सम्मेलन समाजिक सहभागिता के साथ आयोजित किया जा रहा है। खाद्य सामग्री की सहभागिता: सम्मेलन में खाद्य सामग्री का योगदान समाज और गाँव के लोगों द्वारा हो चुका है। भोजन की लगभग सभी सामग्री का प्रबंध किया जा चुका है। आवासीय सुविधाओं में सहभागिता: आयोजन स्थल के निर्माण और अन्य आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था में समाज का सक्रिय योगदान है। बाँस, टेंट, चटाई और कुर्सी के रूप में सहयोग आ रहा है। आर्थिक सहभागिता: आर्थिक सहयोग के रूप में समाज के लोग अपनी सामर्थ्यानुसार योगदान दे रहे हैं। काफ़ी सहयोग प्राप्त हो चुका है। श्रम के रूप में महिलाओं की सहभागिता: गाँव की महिलाओं ने चूल्हे पर रोटी बनाने की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है, जो उनके समर्पण और श्रम का प्रतीक है। अतिथि आवास सहभागिता: सम्मेलन में आने वाले अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था गाँव और समाज के सहयोग से की जा रही है। ठहरने के लिए किसानों के घरों का विकल्प भी उपलब्ध है। व्यक्तिगत सहभागिता: अपने निजी व्यवसायों के अतिरिक्त, समाज के लोग सम्मेलन के कार्यों में समय, साधन एवं मार्गदर्शन देकर भी सहभागिता कर रहे हैं। कई नए युवा और प्रौढ़ भी जुड़ चुके हैं। ============== चार दिवसीय कार्यक्रम – कृपया कार्यक्रम से सम्बंधित अपने सुझाव jvsammelan2025@gmail.com पर भेजें। For more details visit Website: https://www.jvsammelan.com/

Invitation poster for जीवन विद्या सम्मेलन, 2025 — Banda, Uttar Pradesh, 30 October 2025

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जीवन विद्या सम्मेलन, 2025 — 30 October 2025 | Jeevan Vidya